Registry New Rule को लेकर जमीन और मकान की खरीद-फरोख्त करने वालों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। Registry New Rule के तहत संपत्ति रजिस्ट्री से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए गए हैं, जिनकी जानकारी लेना हर खरीदार और विक्रेता के लिए बेहद जरूरी हो गया है।
Property Registry Rule Change में क्या बदला
Property Registry Rule Change के अनुसार सरकार रियल एस्टेट लेन-देन को ज्यादा पारदर्शी और सुरक्षित बनाने पर जोर दे रही है। नए नियमों में दस्तावेज़ सत्यापन को सख्त किया गया है ताकि फर्जी रजिस्ट्री और धोखाधड़ी पर रोक लगाई जा सके। अब जमीन या मकान की रजिस्ट्री के समय मालिकाना हक, पिछला रिकॉर्ड और टैक्स से जुड़े दस्तावेज़ों की सही जांच जरूरी होगी। इसके अलावा ऑनलाइन रजिस्ट्री सिस्टम को भी ज्यादा मजबूत किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया तेज और आसान बन सके।
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New Property Registry Process से जुड़ी जरूरी बातें
New Property Registry Process के तहत आधार लिंकिंग, डिजिटल दस्तावेज़ और ऑनलाइन अपॉइंटमेंट को प्राथमिकता दी जा सकती है। कई राज्यों में अब बिना पूरे दस्तावेज़ों के रजिस्ट्री संभव नहीं होगी। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस के भुगतान को भी डिजिटल किया जा रहा है, जिससे कैश लेन-देन कम हो सके। सरकार का उद्देश्य है कि जमीन और मकान की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़े और आम लोगों को कानूनी विवादों से बचाया जा सके।
Registry New Rule का आम लोगों पर असर
Registry New Rule का असर सीधे तौर पर प्रॉपर्टी खरीदने और बेचने वाले लोगों पर पड़ेगा। नए नियमों से रजिस्ट्री प्रक्रिया थोड़ी सख्त जरूर होगी, लेकिन इससे भविष्य में विवाद और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। जिन लोगों के दस्तावेज़ पूरे और सही होंगे, उनके लिए रजिस्ट्री आसान और सुरक्षित रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से रियल एस्टेट सेक्टर में भरोसा बढ़ेगा और पारदर्शी लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, जमीन और मकान की रजिस्ट्री से पहले नए नियमों की जानकारी रखना बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी कानूनी परेशानी से बचा जा सके और सुरक्षित निवेश किया जा सके।